बहुत तन्हा हूँ मैं इस दौर-ए-जहाँ में अब तो ,
बहुत याद आता है अब दौर उस जवानी का.
कभी तंग जेब होकर फिरना वो मुतमईं सा ,
मेरा वक़्त-ए-मुफ़लिसी अब मुझे याद आ रहा है
तू तेरी याद तेरा ग़म
बस; अब इसके मायने हैं हम
मैंने सोचा के कहीं दूर तुझसे जा के रहूँ,
तेरी ज़मीन तेरा आसमान तेरा जहां.
जिधर भी देखता हूँ , तू -तू है ;
मुझे बता के कहाँ पर नहीं है तेरा निशां..
मंगलवार, 5 अक्टूबर 2010
गुरुवार, 29 जुलाई 2010
विरह अगन
मैं जल रहा
दिए की तरह
स्वदीप्त हो रहा
आभा है - तुम्हारी स्मृतियों
भरे वो पल
आशा है - तुम आओगी ,
और सहलाओगी
कोमल से
मन के कोंपल.
मैं जल रहा
वस्तुतः
तुम्हारी ही तो स्मृत्तियों में
और सोचता कि
तुम आओगी.
बन प्रेम पवन
मुझे छू जाओगी
इस दाह को बुझाओगी.
दिए की तरह
स्वदीप्त हो रहा
आभा है - तुम्हारी स्मृतियों
भरे वो पल
आशा है - तुम आओगी ,
और सहलाओगी
कोमल से
मन के कोंपल.
मैं जल रहा
वस्तुतः
तुम्हारी ही तो स्मृत्तियों में
और सोचता कि
तुम आओगी.
बन प्रेम पवन
मुझे छू जाओगी
इस दाह को बुझाओगी.
सोमवार, 28 जून 2010
बात क्या है जी
शहर वीराँ हैं बात क्या है जी
हम तो मेहमाँ हैं बात क्या है जी
गर्द चेहरे पे जमी रहती थी जिनके पहरों
आज वो खां हैं बात क्या है जी
जब्त कब तक किये रहोगे यूँ
कुछ तो कहना है बात क्या है जी
गर वो कहते तो बहुत कुछ कहते
जब्त अरमाँ हैं बात क्या है जी
दिल धड़कता है तो आवाज़ उनकी आती है
क्या करिश्मा है, बात क्या है जी
क्यों मेरे गाँव की मिट्टी की महक आती है
आई क्या माँ है , बात क्या है जी
हम तो मेहमाँ हैं बात क्या है जी
गर्द चेहरे पे जमी रहती थी जिनके पहरों
आज वो खां हैं बात क्या है जी
जब्त कब तक किये रहोगे यूँ
कुछ तो कहना है बात क्या है जी
गर वो कहते तो बहुत कुछ कहते
जब्त अरमाँ हैं बात क्या है जी
दिल धड़कता है तो आवाज़ उनकी आती है
क्या करिश्मा है, बात क्या है जी
क्यों मेरे गाँव की मिट्टी की महक आती है
आई क्या माँ है , बात क्या है जी
सोमवार, 7 जून 2010
हाईकू

1)
मन उदास
तेरी याद /फिर आई
2)
मेरी हंसी
आती है लौट कर /तेरे आने से
3)
फिर आई
तू /और मेरी हंसी
4)
सूखें है
होठों से हंसी /पोखर धरती पर से
5)
पानी
आँखों में था /नल में नहीं
6)
नर्मदा आई शहर
दुलार करने/गोद में भर
7)
फैसला आया /हादसे का
सज़ा कब ?
8)
सूख चुके आंसू /और पोखर
पानी आया नहीं
9)
बसने लगे /नए गाँव
पुराने मसान पर
10)
विकास हुआ/पेड़ों को काट
रोड़ बने
शनिवार, 15 मई 2010
बहाना
एक कक्षा में एक बच्चा रोज़ देर से आता था , पढने लिखने में कुछ खास नहीं था , जब भी शिक्षक उससे देर से आने का कारण पूछते वो कहता की उसके पिता बीमार हैं और इस लिए उसे घर पर उनके कुछ काम करने पड़ते हैं , रोज़ रोज़ ये ही कारण सुन कर शिक्षक भी समझ गए की बच्चा बहानेबाज़ है , सारे बच्चे उसका मजाक बनाते, फिर एक दिन वो बच्चा समय पर आने लगा , कुछ दिन तक उसकी इस आदत को देख एक दिन शिक्षक ने उससे पूछा की क्या अब उसके पिता उसे काम नहीं बताते इस पर उस बच्चे ने कहा नहीं, शिक्षक ने फिर पूछा क्यों क्या उन्होंने कोई नौकर रख लिया है इस पर सारी कक्षा के बच्चे हस पड़े, उस लड़के ने कहा नहीं क्योंकि पिता का देहांत हो गया है , इस पर शिक्षक सहित पूरी कक्षा सन्न रह गयी.
गुरुवार, 13 मई 2010
निमाड़ी क्षणिकाएं
निमाड़ी क्षणिकाएं
जो वस्तुतः मनी मोहन सिंह जी की सरकार के विश्वासमत के समय अचानक सूझी थीं
म्हारा गाँव म SS नी छे रोड
न उनख ss बटी गया कई करोड़
गिणी गिणी न मरी जओगा
म्हख S कओज की पत्थर तोड़
दो सौ बहोत्तर को चक्कर थो
राजा बणी गयो जो फक्कड़ थो
लोकतंत्र की चिता जल-S-ई न
भुट्टो सेक्यो अक्कल को
जो वस्तुतः मनी मोहन सिंह जी की सरकार के विश्वासमत के समय अचानक सूझी थीं
म्हारा गाँव म SS नी छे रोड
न उनख ss बटी गया कई करोड़
गिणी गिणी न मरी जओगा
म्हख S कओज की पत्थर तोड़
दो सौ बहोत्तर को चक्कर थो
राजा बणी गयो जो फक्कड़ थो
लोकतंत्र की चिता जल-S-ई न
भुट्टो सेक्यो अक्कल को
बुधवार, 12 मई 2010
माँ है
माँ है तो लोरी है
कहानी है
माँ है तो बचपन की हर याद
सुहानी है.
माँ है तो निष्कपट प्रेम
की धार है
माँ है तो शक्ति है
आधार है .
माँ है तो दूध है
दूध का कर्ज है
माँ है बे असर
हर मर्ज है.
माँ है तो वात्सल्य है
ममता है
माँ है तो शीश कहीं और
कहाँ नमता है?
माँ है तो करुणा है
क्षमा है
माँ है तो
रोना मना है.
कहानी है
माँ है तो बचपन की हर याद
सुहानी है.
माँ है तो निष्कपट प्रेम
की धार है
माँ है तो शक्ति है
आधार है .
माँ है तो दूध है
दूध का कर्ज है
माँ है बे असर
हर मर्ज है.
माँ है तो वात्सल्य है
ममता है
माँ है तो शीश कहीं और
कहाँ नमता है?
माँ है तो करुणा है
क्षमा है
माँ है तो
रोना मना है.
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